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यूँ ही फिक्र सी लगी हैं..

यूँ ही फिक्र सी लगी हैं.... जिक्र भी नहीं हैं अब.. किस्सा ए कहानी में कहीं, न तो नज़र आती हैं वो नज्म या तराने में कहीं .... फिर भी फिक्र सी लगी है... जिक्र भी नहीं हैं कहीं ... उन कल्पनाओं का जो कभी हिल्लोरे खाकर दिल में उठा करती थी। गाँव की उस पगडंडी पर चलते चलते। जो मुझे नदियों और खेतों की ओर ले कर जाती थी। खैर!!! वह स्वर्ग ही नही है अब ,तो जिक्र भी नहीं हैं अब.... फिर भी, फिक्र सी लगी हैं.... @☆ ‪#‎ बेख़बर‬ ...

जरा गौर से सुनो!!!

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सुनो! आहट तो सुनो जरा, कोई दस्तक दे रहा है मेरे!!! मेरे इस सुने घर में कोई खलल डाल रहा है मेरी आंतरिकता मे स्थित मेरे मस्तिष्क की गहराईयों में ! ! ! जरा गौर से सुनो!!! किसी की दबिश सुनाई दे रही हैं तुम्हें ! अपने हृदय के नयन पटलो को खोलो और अपने चक्षु को केन्द्रित करो तुम देखोगी किसी की दस्तक को महसुस करोगें उस आहट को जो जो मुझे तुमसे दुर किये जाने के लिये आयी थी।

"कभी गाड़ी नाव पर तो कभी गाड़ी पर नाव"

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क्यों रें अज्जू--- क्या हो रहा हैं आजकल, सुना हैं सरकार आकडो से देश की प्रगति के अंदेशे का झूठा जामा पहना रही हैं। कह रही हैं कि हम प्रगति के अविरल पथ पर लगातार चलायमान हो रहै हैं । क्या सत्यता हैं भई इसमें जरा बताओ तो?? अज्जू- हाँ भाई सुनने मे तो अभी यही आ रहा हैं कि हमारी ग्रोथ बढ़ रही हैं,बड़े बड़े अखबार और पत्रिकाओं मे तो यही छप रहा हैं कि हम उत्थान के पथ पर है। आकडो से भविष्य की नीव रखी जा रही है भाई वर्तमान के परिदृश्य को सापेक्ष रखकर। वर्तमान के परिदृश्य को सापेक्ष रखकर?? तनिक विस्तार से बताओ भाया कैसे ? अज्जू- देख भाई ऊ का हैं न कि आजकल हमारे देश मे आकडो और तथ्यों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा बजाय शुरूआती विकास और ग्रामीण क्षेत्रों मे हो रहै निवेश को छोडकर। ग्रामीण क्षेत्रों मे निवेश ??? यह क्या बोल रहै हो भाई कोन सा निवेश हुआ है ग्रामीण क्षेत्र मे ?? अज्जू-- अरे!ऐसा हमारी सरकार कह रही हैं भ्राता, आजकल क्या अखबार वखबार पढ़ना छोड़ दिये हो का तुम जो ऐसे चकराय रहै हो ग्रामीण क्षेत्रों मे निवेश की बात सुनकर? अरे हाँ ऊ बहुत दिन हो गया हैं न परीक्षा के चलते अखबार पर नजर ही नहीं डा