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तो, देशभक्ति खुद डूबने डूबाने लगी.

भ्रम की दवायें असर दिखाने लगी, अंधभक्ति , हर घर से आने लगी. अपने अपने राष्ट्रवाद पर हुआ विवाद, तो, देशभक्ति खुद डूबने डूबाने लगी. मैने अपना लहजा, जरा सा गर्म किया, वह तो उठी, और महफिल से जाने लगी. कभी मेरे पास,उसे कह रही थी फरामोश, अब,खुद ही आजमाईश करने कराने लगी.                                

क्या नोटबंदी से गरीबी में मंदी आयेंगी मोदीजी?

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  हाल ही में मोदी सरकार के एक बहुत बड़े फैसले जिसमें 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया गया, ने पुरे भारत में हड़कम्प मचा के रखा हुआ है. जहाँ सरकार के साथ खड़े लोग इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुये इसे कालेधन पर मोदी की सर्जिकल स्ट्राईक बता रहे है वहीं विपक्ष का रवैया इससे बिल्कुल अलग थलग नजर आ रहा है. नोटबंदी के बाद से सोशल साइट्स, टेलिविजन, अखबार आदि सभी सूचना के माध्यम इससे होने वाले नफे नुकसान पर अपने अपने विचारों को रख रहे है. देश का उच्चवर्गीय खेमा जिसे इस फैसले से सबसे ज्यादा ठेस पँहुची है(ऐसा सरकार और उनके समर्थकों का मानना हैं) जिनके पास काले धन का अंबार लगा था  वह भी धीमें स्वर में लेकिन बड़ी तत्परता के साथ सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहा है. लेकिन एक दुसरा निम्नमध्यमवर्गीय खेमा भी हैं जो  अपने दैनिक रोजगार को छोड़ घंटो लाईनों में लगकर भी सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहा है, ये सोचते हुये कि हर बार गरीब ही क्यों सरकार की कठपुतली बनती है हमेशा ? हर बार देश का गरीब तबका ही क्यों दंश झेलता है ? हर बार सरकार के किसी भी फैसले का उपहास का पात्र गरीब ही क्यों

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